
Faridabad साइबर पुलिस ने दो युवकों को गिरफ्तार किया है, जो कथित रूप से एक बड़े share market fraud में शामिल थे। आरोप है कि दिल्ली के रहने वाले Ankit और Amit Kumar ने एक Faridabad निवासी से ₹93.51 लाख की ठगी में अहम भूमिका निभाई। पुलिस के अनुसार, आरोपी युवकों ने शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर फर्जी एप और वेबसाइट्स के माध्यम से पीड़ित को जाल में फंसाया। शुरुआत में मामूली लाभ दिखाकर उसका भरोसा जीता गया, लेकिन जैसे-जैसे रकम बड़ी होती गई, पैसे निकालना असंभव होता गया। यह मामला न केवल आर्थिक अपराध की एक बड़ी बानगी है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि investment fraud किस तेजी से डिजिटल माध्यमों के ज़रिए फैल रहा है।
WhatsApp के ज़रिए फंसाया जाल, नकली Demat App बना हथियार
इस ठगी की शुरुआत जुलाई 2024 में हुई जब पीड़ित को एक WhatsApp ग्रुप में जोड़ा गया, जिसमें “stock market tips” दिए जा रहे थे। इस ग्रुप में शामिल अन्य लोगों की नकली प्रोफाइलों के ज़रिए यह माहौल बनाया गया कि निवेश से बहुत अच्छा रिटर्न मिल सकता है। जल्द ही उसे एक ऐप DAIWA SECURITIES AI Smart Demat पर अकाउंट बनाने को कहा गया। शुरूआती निवेश ₹10,000 का था, जिसमें से ₹1,000 निकालने दिया गया ताकि भरोसा बढ़े। इसके बाद, बड़ी राशि निवेश कराई गई और अंततः जब वह रिटर्न मांगने लगा, तो न कोई जवाब मिला न पैसा वापस। यही आजकल की online trading fraud की सबसे बड़ी रणनीति बन गई है।
Bank Account से ₹8 लाख की ट्रांजैक्शन, आरोपी ने खुद कबूला
Faridabad पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी Ankit ने अपने बैंक अकाउंट को इस ठगी में इस्तेमाल करने दिया। उसके खाते में ₹8 लाख की रकम ट्रांजैक्ट की गई थी। उसने बताया कि उसके पुराने जानने वाले Amit ने यह खाता शेयर बाजार कंपनी के लिए इस्तेमाल करने को कहा था। आगे की जांच में पता चला कि असली कंपनी नहीं थी, बल्कि एक fake investment scam का नेटवर्क था, जो कई खातों के ज़रिए लोगों के पैसे निकाल रहा था। पुलिस का मानना है कि Ankit और Amit इस गिरोह में “money mule” के तौर पर काम कर रहे थे।
Judicial Custody में भेजे गए आरोपी, गिरोह का विस्तार जारी
Faridabad पुलिस ने दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि यह केवल “टिप ऑफ द आइसबर्ग” है और इस गिरोह के पीछे कई अन्य लोग और डिजिटल माध्यम शामिल हैं। साइबर सेल इस केस को गंभीरता से ले रही है क्योंकि ऐसे stock trading scams हाल के दिनों में काफी बढ़े हैं। पहले भी Gurgaon और Delhi NCR क्षेत्र से ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहां WhatsApp ग्रुप्स और फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स के ज़रिए लाखों की ठगी हुई है। पुलिस अन्य खातों की जांच कर रही है जिनमें इस गिरोह के पैसे गए हैं।
North India में बढ़ते share market fraud का ट्रेंड
यह केस North India में बढ़ रहे stock fraud cases का हिस्सा है। हाल ही में Gurgaon में एक पीड़ित से ₹1 करोड़ की ठगी हुई थी, जबकि एक Retired BSF Officer को ₹24 लाख का चूना WhatsApp ग्रुप और fake IPO offer के ज़रिए लगाया गया। ठग खुद को ब्रोकर या ट्रेड एनालिस्ट बताकर पहले credibility बनाते हैं और फिर बड़ी रकम ऐंठ लेते हैं। VOIP कॉल्स और नकली वेबसाइट्स के ज़रिए ये पूरे गिरोह operate करते हैं, जिनके तार अक्सर दूसरे राज्यों या विदेशों से जुड़े होते हैं। ऐसे मामलों में पैसे की रिकवरी लगभग असंभव हो जाती है यदि समय पर रिपोर्ट न की जाए।
Middlemen की भूमिका और नए साइबर क्राइम नेटवर्क
इस केस में Ankit और Amit जैसे लोग उस नेटवर्क का हिस्सा हैं जिन्हें “middlemen” कहा जा सकता है। ये लोग बैंक खाता, सिम कार्ड या अन्य डॉक्यूमेंट देकर असली अपराधियों के लिए रास्ता बनाते हैं। हालिया मामलों में देखा गया है कि गिरोह बड़े पैमाने पर money laundering कर रहे हैं, जहां एक व्यक्ति से रकम लेकर 5 से 10 खातों में उसे बांट दिया जाता है ताकि ट्रैकिंग मुश्किल हो जाए। पुलिस अब ऐसे मिडलमेन पर फोकस कर रही है ताकि नेटवर्क के ऊपरी स्तर तक पहुंचा जा सके।
पीड़ितों के लिए चेतावनी: ऐसे Investment Offers से रहें सावधान
- अनजाने WhatsApp ग्रुप्स या सोशल मीडिया मैसेज से आए investment offers को नजरअंदाज करें।
- कोई भी Demat App डाउनलोड करने से पहले उसकी SEBI रजिस्ट्री और लाइसेंस जांचें।
- शुरूआती निवेश से मिले लाभ के बहकावे में आकर बड़ी रकम न डालें।
- कोई भी ऐप जो Withdrawal रोक दे या Customer Support बंद कर दे, वह Scam हो सकता है।
- पीड़ित होते ही नजदीकी साइबर क्राइम थाना या वेबसाइट cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें।
डिजिटल ठगी के युग में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
जैसे-जैसे लोग डिजिटल रूप से निवेश की तरफ बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे cyber-enabled stock scams भी तेजी से बढ़ रहे हैं। खासकर छोटे निवेशक, सीनियर सिटिज़न और पहली बार निवेश करने वाले लोग ऐसे जाल में जल्दी फंस जाते हैं। इस केस से यह स्पष्ट है कि अपराधी अब छोटे-छोटे मिडलमेन का इस्तेमाल करके डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर रहे हैं। सरकार और पुलिस को चाहिए कि वे ऐसे फ्रॉड्स के खिलाफ सख्त कानून बनाए और लोगों को जागरूक करने के लिए नियमित अभियान चलाएं।
निष्कर्ष
Faridabad पुलिस की यह कार्रवाई एक बड़े share market fraud नेटवर्क का पर्दाफाश करने की दिशा में एक अहम कदम है। लेकिन जब तक आम लोग सतर्क नहीं होंगे, ऐसे साइबर अपराध फलते-फूलते रहेंगे। निवेश से पहले सोचें, जांचें और भरोसेमंद स्रोतों से ही कदम बढ़ाएं। वरना मुनाफे का सपना देखते-देखते लाखों गंवाना पड़ सकता है।
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